|
| वायु सेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल अरूप राहा ने मंगलवार को कहा कि नियंत्रण रेखा के पार आतंकी शिविरों पर लक्षित हमने के मद्देनजर स्थिति अभी Сसामान्य नहींТ है और सशस्त्र बल किसी भी चुनौती से निपटने के लिए तैयार हैं। राहा ने कहा कि यह संयोग ही है कि पाकिस्तानी वायु सेना का Сउच्च स्तरीयТ अभ्यास ऐसे समय में हो रहा है जब भारत और पाकिस्तान के बीच काफी तनाव है। वायु सेना प्रमुख ने आठ अक्तूबर के वायु सेना दिवस से पहले पारंपरिक वार्षिक संवाददाता सम्मेलन में हालांकि सेना की ओर से पिछले सप्ताह किये गए लक्षित हमले के बारे में सवालों का जवाब देने से इंकार किया। उन्होंने कहा कि बलों के पास शत्रुओं को दंडित करने की क्षमता है लेकिन आक्रामक भूमिका के बारे में फैसला सरकार द्वारा लिया जाता है। चीफ ऑफ स्टाफ कमेटी (सीओएससी) के अध्यक्ष राहा ने कहा, Сवायु सेना, सेना और नौसेना हमेशा तैयार है।Т लक्षित हमले के बारे में कोई टिप्पणी नहीं करने को लेकर एक सवाल के जवाब में राहा ने कहा कि वह यह तय नहीं कर पा रहे थे कि मीडिया से बातचीत आयोजित करें या नहीं क्योंकि वह जानते थे कि हर कोई इस मुद्दे पर सवाल पूछेगा। एयर चीफ मार्शल ने कहा, Сमैं समझता हूं कि मुझे इस पर कुछ भी नहीं कहना चाहिए क्योंकि यह काफी संवेदनशील है और चीजें अभी सामान्य नहीं हुई हैं। राहा ने जोर देकर कहा कि भारतीय वायु सेना के पास किसी भी आकस्मिक स्थिति से निपटने की क्षमता है। राहा सेना की तीनों सेवाओं में पहले प्रमुख हैं जो लक्षित हमले के बाद मीडिया के समक्ष आए हैं। अधिकारी इस अभियान के बारे में कुछ नहीं कह रहे हैं और इस बारे में अभी तक केवल सैन्य अभियान महानिदेशक का संक्षिप्त बयान आया है। राहा ने कहा कि लक्षित हमलों का मुद्दा संवेदनशील है और बल अपनी क्षमता बढ़ाने पर ध्यान केंद्रीत किये हुए है लेकिन यह किसी खास देश के खिलाफ केंद्रीत नहीं है। उन्होंने कहा Сहम किसी देश या प्रतिद्वन्द्वी को ध्यान में रखकर अपनी क्षमताओं का विकास नहीं कर रहे हैं। हम अपनी सामरिक पहुंच का निर्माण करने और अपने प्रतिद्वन्द्वी के समक्ष प्रतिरोधक पेश करने के लिए ऐसा कर रहे हैं। और अगर किसी आकस्मित स्थिति में इन क्षमताओं के उपयोग की जरूरत पड़े तब हत ऐसा करेंगे।Т वायु सेना प्रमुख ने कहा कि यह सर्वश्रेष्ठ होता कि बल की इच्छित सूची को पूरा किया जाता। उन्होंने कहा कि पहले खरीद Сपरिणाम आधारित नहीं प्रक्रिया आधारित होती थीТ और लेकिन अब चीजें बदल रही हैं। पहले खरीद लम्बी प्रक्रिया थी और अब सरकार लीक से हटकर सोच रही है। इसका उदाहरण राफेल सौदा है जिस पर नौ वर्षों तक काम हुआ। लेकिन अब सरकार से सरकार के स्तर पर फ्रांस के साथ बातचीत करके प्रधानमंत्री ने निर्णय किया।
|