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रेल बजट को आम बजट में मिलाने के प्रस्ताव को आज मंजूरी दे सकती है कैबिनेट, बदल जाएगा BUDGET पेश करने का अंदाज

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आम बजट एक फरवरी को पेश हो सकता है। केन्द्रीय मंत्रिमंडल की बुधवार को होने वाली बैठक में इस पर फैसला किया जा सकता है। अब तक आम बजट फरवरी के आखिरी दिन पेश होता रहा है।

सरकार रेलवे बजट को भी आम बजट में मिलाने पर विचार कर रही है। अब अलग से रेल बजट पेश नहीं किया जाएगा। इन सभी मुद्दों पर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में बुधवार को होने वाली मंत्रिमंडल की बैठक में विचार कर निर्णय लिये जाने की संभावना है। केंद्रीय मंत्रिमंडल रेल बजट को आम बजट में मिलाने के प्रस्ताव पर आज मंजूरी दे सकता है। बैठक में इस प्रस्ताव को हरी झंडी मिलने की उम्मीद है। रेल मंत्री सुरेश प्रभु पहले ही बजट के विलय के प्रस्ताव को अपनी सहमति दे चुके हैं। कैबिनेट की बैठक में प्रभु और रेलवे बोर्ड के चेयरमैन एके मित्तल भी शामिल होंगे, जिससे वे इस ऐतिहासिक फैसले का हिस्सा बन सकें। इससे रेल बजट को अलग से पेश करने की 92 साल पुरानी परंपरा खत्म हो जाएगी। रेलवे के सूत्रों ने कहा कि कैबिनेट आज बजट विलय के प्रस्ताव पर विचार कर सकता है।

बजट में विभिन्न मंत्रालयों के खर्च को योजना और गैर-योजना बजट के तौर पर दिखाये जाने की व्यवस्था को भी समाप्त किये जाने का प्रस्ताव है। इस पर भी बैठक में निर्णय लिया जा सकता है। सरकार का इरादा समूची बजट प्रक्रिया को एक अप्रैल को नया वित्त वर्ष शुरू होने से पहले पूरी करने का है, ताकि बजट प्रस्तावों को नया वित्त वर्ष शुरू होने के साथ ही अमल में लाया जा सके। यही वजह है कि बजट बनाने की पूरी प्रक्रिया को समय से पहले शुरू किया जा रहा है और फरवरी अंत के बजाय फरवरी के पहले दिन बजट पेश करने का फैसला किया जा सकता है।

सूत्रों के अनुसार सरकार संसद का बजट सत्र 25 जनवरी 2017 से पहले बुला सकती है। एक फरवरी को आम बजट पेश करने से एक दो दिन पहले आर्थिक समीक्षा पेश की जा सकती है। सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) के अग्रिम अनुमान आंकड़े अब फरवरी के बजाय सात जनवरी को पेश किये जा सकते हैं। विभिन्न मंत्रालय अब व्यय की मध्यवर्षीय समीक्षा 15 नवंबर तक पूरी कर सकते हैं। सूत्रों का कहना है कि इसके पीछे मकसद पूरी बजट प्रक्रिया को 24 मार्च से पहले समाप्त करना है। विनियोग विधेयक और वित्त विधेयक सहित पूरा बजट संसद में 24 मार्च से पहले पारित कराने की योजना है। वित्त मंत्रालय द्वारा इस संबंध में तैयार प्रस्ताव में कहा गया है कि इस दौरान संसद में 10-15 फरवरी से 10-15 मार्च तक तीन सप्ताह का अवकाश रखा जायेगा। इस दौरान संसदीय समितियां विभिन्न मंत्रालयों और विभागों के बजट की गहन जांच परख करेंगी।

रेल बजट को आम बजट में मिला दिये जाने और बजट पेश करने की तिथि पहले करने के बाद अलग से विनियोग विधेयक और लेखानुदान पेश करने की आवश्यकता नहीं होगी। मौजूदा प्रक्रिया में अप्रैल से जून तीन माह के लिये पहले लेखानुदान पारित कराया जाता है। रेलवे बजट समाप्त कर दिया जायेगा और उसके सभी प्रस्ताव आम बजट में शामिल कर दिये जाएंगे बावजूद इसके रेलवे एक अलग इकाई का अपना रतबा बनाये रखेगी। रेलवे की विभागीय तौर पर चलाये जाने वाले एक वाणिज्यिक उपक्रम की अलग पहचान बनी रहेगी। सूत्रों का कहना है कि रेलवे की कामकाज में स्वायत्तता भी बनी रहेगी। रेलवे को, जैसा कि वर्तमान व्यवस्था में है, वित्तीय अधिकार भी बने रहेंगे। रेल बजट के आम बजट में विलय के बाद रेलवे को केन्द्र सरकार को लाभांश का भुगतान भी नहीं करना होगा। वित्त मंत्रालय अन्य मंत्रालयों की तरह रेलवे को भी उसके पूंजी व्यय के लिये सकल बजट समर्थन देता रहेगा। जहां तक योजना और गैर-योजना बजट वर्गीकरण को समाप्त करने की बात है, वित्त मंत्री अरुण जेटली इस साल के बजट में पहले ही इसकी घोषणा कर चुके हैं।

सूत्रों का कहना है कि बजट को एक महीना पहले पेश करने और समूची बजट प्रक्रिया नये वित्त वर्ष की शुरआत से पहले पूरी होने से मंत्रालयों और विभागों को अपनी योजनाओं के क्रियान्वयन को वित्तीय वर्ष की शुरुआत से ही बेहतर ढंग से करने में मदद मिलेगी। विभिन्न पक्षों के साथ बजट पूर्व विचार विमर्श को 25 दिसंबर से पहले पूरा कर लिया जाएगा।


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