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| भारत और नेपाल ने कमजोर हुए संबंधों को दुरुस्त करने के प्रयासों के तहत नेपाल के प्रधानमंत्री प्रचंड की नई दिल्ली यात्रा से पहले सोमवार को व्यापक वार्ता की और सुरक्षा, ऊर्जा तथा जल संसाधन जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में सहयोग स्थापित करने का फैसला किया। प्रचंड की यात्रा को पारस्परिक हित एवं चिंता के मुद्दों पर चर्चा के अवसर के रूप में देखा जा रहा है। विदेश मंत्री सुषमा स्वराज और उनके नेपाली समकक्ष प्रकाश शरण महात के बीच वार्ता के दौरान दोनों पक्षों ने 15 सितंबर से शुरू हो रही प्रचंड की भारत यात्रा को लेकर भी चर्चा की। पिछले महीने पदभार संभालने के बाद प्रचंड की यह पहली विदेश यात्रा होगी। विदेश मंत्रालय ने बैठक के बाद कहा, Сदोनों पक्षों ने व्यापार एवं निवेश, रक्षा एवं सुरक्षा, आर्थिक एवं विकास भागीदारी, अवसंरचना विकास, ऊर्जा तथा जल संसाधन, सामान के आवागमन, लोगों के बीच संपर्कों, सेवाओं तथा विचारों के आदान-प्रदान को सुगम बनाने जैसे विविध क्षेत्रों में सदियों पुराने घनिष्ठ एवं मित्रवत संबंधों को और भी मजबूत बनाने तथा गहरा करने की प्रतिबद्धता दोहराई।Т मंत्रालय ने यह भी कहा, Сनेपाल के प्रधानमंत्री की यात्रा दोनों पक्षों को पारस्परिक हित एवं चिंता के मुद्दों पर चर्चा का अवसर भी उपलब्ध कराएगी तथा दोनों देशों के बीच विविध क्षेत्रों में सदियों पुराने घनिष्ठ एवं मित्रवत संबंधों को मजबूत करने का मार्ग भी प्रशस्त करेगी।Т भारत की चार दिवसीय यात्रा के दौरान प्रचंड अपने भारतीय समकक्ष नरेंद्र मोदी से महत्वपूर्ण द्विपक्षीय एवं क्षेत्रीय मुद्दों पर बातचीत करेंगे। नेपाल के नए संविधान को लेकर पिछले साल मधेसियों के आंदोलन की वजह से सीमा पर महीनों तक चली नाकाबंदी के कारण भारत-नेपाल संबंधों में खटास पैदा हो गई थी। काठमांडो ने तब भारत पर आरोप लगाया था कि वह मधेसियों के समर्थन में Сअनाधिकारिक नाकेबंदीТ कर रहा है। भारत से सामान की आपूर्ति सामान्य होने के बाद भी द्विपक्षीय संबंधों में खटास जारी रही और नेपाल के पूर्व प्रधानमंत्री केपी ओली ने भारत पर अपनी सरकार को अपदस्थ करने तथा नेपाल में राजनीतिक अस्थिरता पैदा करने का आरोप लगाया। भारत ने इस आरोप को पूरी तरह से खारिज किया।
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