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| राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने आज कहा कि आईआईटी और एनआईटी जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों से पढ़े छात्रों को महज अच्छा वेतन अर्जित करने तक खुद को सीमित नहीं रखना चाहिए बल्कि अपने समाज को अच्छी जानकारी के आधार पर सहयोग करने के लिए कदम उठाना चाहिए। राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान दिल्ली के पहले दीक्षांत समारोह में राष्ट्रपति ने कहा कि इन युवा छात्रों की सफलता अपने समुदाय और देश के लिए समस्याओं के समाधान के प्रति किए गए काम से आंकी जाएगी। उन्होंने कहा, Сमैं आपको सलाह देता हूं कि जो कौशल आपने हासिल किया है, जो जानकारी आपके पास है वह किसी बहुराष्ट्रीय कंपनी के उत्पाद को बढ़ावा देकर आरामदायक जिंदगी बिताने या उच्च वेतन पैकेज हासिल करने तक सीमित नहीं रखा जाना चाहिए।Т उन्होंने कहा, Сएनआईटी और आईआईटी जैसे संस्थानों से इंजीनियरिंग के स्नातक इससे कहीं अधिक हैसियत रखते हैं। आपकी सफलता महज इस बात से नहीं आंकी जाएगी कि आप कितना कमाते हैं और अपने परिवार को कितनी सुविधा देते हैं बल्कि यह सफलता इससे कहीं ज्यादा है। आप कितना अखबार पढ़ते हैं, शोध में आप क्या पहल करते हैं, वैज्ञानिक और तकनीकी ज्ञान पर आधारित अपने समुदाय को आप क्या फायदा और सुविधा पहुंचाते हैं। इंजीनियरिंग और प्रौद्योगिकी संस्थानों से निकलने वाले छात्रों की परख ऐसे होगी। दीक्षांत समारोह के बाद प्रणब मुखर्जी ने कहा कि प्रतियोगी दुनिया में छात्र खुद से खड़े होंगे लेकिन उन्हें परेशान महसूस नहीं करना चाहिए। राष्ट्रपति ने कहा कि एनआईटी के लिए यह पहला दीक्षांत समारोह मील का पत्थर साबित होगा। उन्होंने कहा कि अलग-अलग परिसरों से चलने के बावजूद इस संस्थान ने शिक्षा के स्तर को बनाए रखा है और साथ ही शैक्षणिक गतिविधियों के लिए बेहतर ढांचागत सुविधाएं भी उपलब्ध कराई है। इस संस्था ने बहुत कम समय मे अपनी अलग जगह बनाई है। राष्ट्रपति ने कहा कि आने वाले समय में राष्ट्र निर्माण के वाहक बनने वाले युवकों को निखारने में हमारे उच्च शिक्षण संस्थानों की बहुत बड़ी जिम्मेदारी है। इन संस्थानों को छात्रों को विद्वान बनाने और उनमें क्षमता निर्माण को बढ़ावा देने के लिए हर संभव प्रयास करना चाहिए। साथ ही इन्हें सतत विकास और सीख को लगातार बढ़ावा देना चाहिए। उन्होंने कहा कि शिक्षा व्यवस्था के जरिए छात्रों में विशेष क्षमताओं को बढ़ावा दिया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि इन क्षमताओं को तीन महत्वपूर्ण वर्गो में बांटा जा सकता है जिसमें तकनीक के इस्तेमाल को आसान बनाना, संस्थानों को ज्ञान नेटवर्क और विश्व स्तरीय उपकरणों से सृजित होना चाहिए। इससे छात्रों को आगे बढ़ने में सहायता मिलेगी और साथ ही वे आधुनिक उपकरणों से वाकिफ भी हो सकेंगे। साथ ही शिक्षकों को भी नई तकनीक से खुद को परिचित रखना चाहिए जिसके बाद ही छात्रों में उच्च स्तर का ज्ञान आ सकेगा। राष्ट्रपति ने कहा कि शोध और नवाचार को प्राथमिकता देने से सुदृढ़ शोध कार्यशाला हमारे इंजीनियरिंग छात्रों को विनिर्माण और डिजाइन में नया सीखने में बहुत सहायक साबित हो सकती है। इस क्षेत्र में इंटरनेट पर आपार जानकारी मौजूद है। छात्रों को संस्थान के बाहर से भी ज्ञान अर्जित के लिए अग्रसर रहना चाहिए और नवीन डिजाइन और मॉडल विकसित करने के लिए खुद रूपरेखा तैयार करनी चाहिए। प्रणब मुखर्जी ने कहा कि इंजीनियरों और वैज्ञानिकों को बदलते हुए समाज की जरूरत से हर समय परिचित रहना चाहिए और मानवीय पहलुओं को ध्यान में रखते हुए समस्याओं का निर्धारण करना चाहिए। उन्होंने कहा कि व्यक्तित्व के संपूर्ण विकास पर जोर एक महत्वपूर्ण पहलू है। सामाजिक विकास के लिए उद्यमिता को प्रोत्साहन दिया जाना चाहिए जिस के लिए छात्रों मे मानव जीवन को बेहतर बनाने की सोच पैदा की जानी चाहिए। राष्ट्रपति ने कहा कि भारत में भविष्य में तकनीकी शिक्षा की दिशा आईआईटी और एनआईटी जैसे इंजीनियरिंग संस्थान तय करेंगे। इन संस्थानों की स्थापना विज्ञान और तकनीक के क्षेत्र में उच्च स्तर की शिक्षा देने के लिए की गयी थी। उत्कृष्ट शोध और शैक्षणिक ढांचागत सुविधाएं और समर्पित फैकल्टी किसी भी संस्थान को शीर्ष पर ले जाने में अहम भूमिका अदा करते है। उन्होंने कहा कि छात्रों को वैश्विक स्तर के लिए प्रशिक्षित करने के लिए एक मजबूत संकाय की जरूरत होती है साथ ही अंतर्राष्ट्रीय संगोष्ठियों में और कार्यशालाओं में भागीदारी और पत्र पत्रिकाओं में शोधपत्रों के प्रकाशन को भी प्राथिकता देनी चाहिए। राष्ट्रपति ने कहा कि स्किल इंडिया, स्टार्ट इंडिया जैसी पहलों में अपनी विशेषज्ञता का इस्तेमाल कर हमारे उच्च शिक्षण संस्थानों के छात्र अहम रोल अदा कर सकते है। साथ ही संस्थानों को जमीनी स्तर की समस्याओं के समाधान के लिए भी अपने छात्रों की पहचान करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि भारत एक पुरानी भूमि है, लेकिन यह एक युवा राष्ट्र है। आजादी के बाद इस देश ने जबरदस्त तरीके से विकास किया है। उद्योग से लेकर कृषि और सेवा क्षेत्र सहित सभी क्षेत्रों में हमने विकास किया है और साथ ही हम जल्द ही दुनिया के विकसित देशों में खुद को खड़ा देख सकते है। हमारी आशाएं ज्यादा है लेकिन इनको हासिल किया जा सकता है। प्रणब मुखर्जी ने कहा कि योग्यता, कौशल किसी भी व्यक्ति का विश्वास बढ़ाता है और यह सारी विशेषताएं हमारे इंजीनियरों, वैज्ञानिकों, प्राशसनिक अधिकारियों, नीति निर्माताओं, डॉक्टरों, अधिवक्ताओं, शोधकर्ताओं और विद्वानों में मौजूद है। इन सभी पर हमारे देश के विकास की जिम्मेदारी है। राष्ट्रपति ने सभी छात्रों को आने वाले जीवन के लिए शुभकामनाएं दी और साथ ही कहा कि समाज में बदलाव का वाहक बनने के लिए सबकी नजरे उन पर रहेगी।
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