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ब्रिटेन का अलग होना लगभग तय, काउंटिंग जारी...

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ब्रिटेन का यूरोपीय संघ (ईयू) से अलग होना लभगग तय माना जा रहा है. गुरुवार को वोटिंग खत्म होने के बाद शुक्रवार को वोटों की गिनती अभी जारी है.

सबसे ताजा आंकड़ों में लीव के पक्ष में 1 करोड़ 10 लाख  वोट पड़े हैं. 'रीमेन' यानी यूनियन में बने रहने के पक्ष में पड़े वोटों से यह 6 लाख अधि‍क  है. नतीजों के बाबत पाउंड 31 साल के न्यूनतम स्तर पर पहुंच गया है, वहीं भारतीय शेयर बाजार सेंसेक्स में भी 940 अंकों की गिरावट दर्ज की गई है.

एक अनुमान के मुताबिक, 4 करोड़ 60 लाख से ज्यादा लोगों ने मतदान में हिस्सा लिया. इनमें करीब 12 लाख भारतीय मूल के हैं. इस जनमत संग्रह के रुझान आने शुरू हो गए हैं. 382 में से अभी 309 क्षेत्रों के परिणाम घोषित कर दिए गए हैं. ब्रिटेन में किसी भी चुनाव में जनभागीदारी का यह रिकॉर्ड है. राजधानी लंदन सहित दक्षिण-पूर्व ब्रिटेन के कई इलाकों में खराब मौसम के बावजूद लोगों में मतदान को लेकर खासा उत्साह दिखा.
नतीजे आने से पहले पाउंड 1.50 डॉलर पर चल रहा था. लेकिन जब नतीजों का रुझान यूरोपीय यूनियन से अलग होने के पक्ष में दिखने लगा तो पाउंड 1.41 डॉलर पर आ गया. इसके बाद गोता लगाने का दौर शुरू हुआ और पाउंड 31 साल के सबसे निचले स्तर पर आ गया. डॉलर के मुकाबले शुक्रवार को पाउंड 1.3466 पर रहा.

ब्रिटिश प्रधानमंत्री डेविड कैमरन ने पत्नी सामंता के साथ वोट डालने के बाद ब्रिमेन (ब्रिटेन का ईयू में बने रहना) के समर्थन में ट्वीट किया. उन्होंने कहा कि अपने बच्चों के बेहतर भविष्य के लिए ईयू में बने रहने के पक्ष में मतदान करें. लंदन के पूर्व मेयर बोरिस जॉनसन ने ट्वीट कर लोगों से Brexit (ब्रिटेन का ईयू से बाहर जाना) का समर्थन करने और देश की स्वतंत्रता का जश्न मनाने की अपील की. जॉनसन देश के अगले प्रधानमंत्री हो सकते हैं.

साल 2008 में ग्रेट ब्रिटेन की अर्थव्यवस्था मंदी की चपेट में आ गई. देश में बेरोजगारी बढ़ गई. इसकी वजह से एक बहस ने जन्म लिया कि क्या ब्रिटेन को यूरोपियन यूनियन से अलग हो जाना चाहिए? इस मांग को 2015 में ब्रिटेन में हुए आम चुनावों में यूनाइटेड किंगडम इंडिपेंडेंस पार्टी (यूकेआईपी) ने उठाया. इस धड़े का मानना है कि अगर ब्रिटेन यूरोपियन यूनियन से अलग हो जाता है तो देश की सारी दिक्कतें दूर हो जाएंगी.


ब्रिटेन में ही एक धड़ा यह भी मानता है कि ब्रिटेन का यूरोपियन यूनियन से अलग होना देश के लिए बड़ा झटका होगा. प्रधानमंत्री डेविड कैमरन और कंजर्वेटिव पार्टी का भी यही मानना है. ब्रिटेन के नागरिकों की राय भी इस मसले पर बंटी हुई है. इसलिए मामले पर जनमतसंग्रह करवाना सही समझा गया. तकरीबब 4 करोड़ 60 लाख लोग जनमतसंग्र में हिस्सा लेने के योग्य हैं.

ब्रिटेन को सालाना यूरोपियन यूनियन के बजट के लिए 9 अरब डॉलर नहीं देने होंगे.

ब्रिटेन की सीमाओं पर बिना रोक-टोक के आवाजाही पर लगाम लगेगी.

फ्री वीजा पॉलिसी की वजह से ब्रिटेन को हो रहा नुकसान भी कम होगा.

 

ब्रिटिश जीडीपी को 1 से 3 प्रतिशत नुकसान का अनुमान.

ब्रिटेन के लिए सिंगल मार्केट सिस्टम खत्म हो जाएगा.

दूसरे यूरोपीय देशों में ब्रिटेन को कारोबार से जुड़ी दिक्कतें होंगी.

पूरे यूरोपियन यूनियन पर ब्रिटेन का दबदबा खत्म हो जाएगा.

भारत को हो सकता है नुकसान

ब्रिटेन के ईयू से अलग होने पर पाउंड 12 प्रतिशत तक लुढ़क सकता है.

कमजोर पाउंड की वजह से डॉलर की मांग में इजाफा होगा.

मजबूत डॉलर के कारण रुपये की कीमत 70 के लेवल तक पहुंच सकती है.

भारतीय वाणिज्य मंत्रालय के डाटा के मुताबिक 2015-16 में ब्रिटेन के साथ भारत का द्विपक्षीय व्यापार 14.02 अरब डॉलर यानी 945 अरब रुपये रहा. खास बात यह है कि हमने ब्रिटेन से 5.19 अरब डॉलर का आयात किया और 8.83 अरब डॉलर का निर्यात किया. भारत को इस कारोबार में 3.64 अरब डॉलर का फायदा हुआ.

कुछ अध्ययनों के मुताबिक ब्रिटेन के ईयू से अलग होने पर उसके आयात में 25 प्रतिशत की कमी आएगी. ऐसे में भारत के कारोबार को नुकसान हो सकता है.

सिर्फ ब्रिटेन में 800 भारतीय कंपनियां है. जिसमें 1 लाख से ज्यादा लोग काम करते हैं. भारतीय आईटी कंपनियों की 6 से 18 प्रतिशत कमाई ब्रिटेन से होती है. भारतीय कंपनियां ब्रिटेन के रास्ते ही यूरोप के 28 देशों तक पहुंचती हैं. अगर ब्रिटेन ईयू से बाहर निकला तो यह पहुंच बंद हो जाएगी. यूरोप के देशों से भारत को नए करार करने होंगे. इससे कंपनियों के खर्च में इजाफा होगा. साथ ही हर देश के नियम-कानूनों को भी पालन करना होगा.


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