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| सरकार ने ई-फॉर्मेसी पर रोक लगाने की जगह इसे रेग्युलेट करने की योजना तैयार कर ली है। जल्द ही नई गाइडलाइन जारी कर दी जाएगी, जिसके दायरे में सभी ई-कॉमर्स कंपनियां आएंगी। इसमें ई-फॉर्मेसी को आधार से लिंक करना, ओरिजिनल प्रिस्क्रिप्सन, केमिस्ट का ऑथेंटिकेशन और दवाइयों के ट्रैकिंग व मॉनेटरिंग्र सिस्टम जैसे प्रावधान होंगे। इसके लिए सरकार ने ड्रग एंड कॉस्मेटिक एक्ट में भी बदलाव करने की बात कही है। आइए जानते हैं कि ई-फॉर्मेसी का मिसयूज रोकने के लिए क्या है सरकार की तैयारीЕ. आधार कार्ड से रुकेगा मिसयूज सुरक्षित ई-फॉर्मेसी के लिए आधार कार्ड की भूमिका महत्वपूर्ण होगी। आधार के जरिए मरीज की मेडिकल हिस्ट्री तैयार की जाएगी, जो कंप्यूटर में सुरक्षित हो जाएगी। मेडिकल हिस्ट्री में नाम व पता के अलावा मरीज की बीमारी, कंसल्ट करने वाले डॉक्टर व दवाइयों के नाम भी होंगे। ऐसे में यह जानना आसान होगा कि मरीज को किन दवा की जरूरत है। अगर कोई आशंका हो तो डॉक्टर की डिटेल निकालकर उससे भी जानकारी ली जा सकेगी। ट्रैकिंग एंड मॉनेटरिंग सिस्टम इस सिस्टम के तहत ई-फॉर्मेसी के तहत सेल की जाने वाली सभी दवाइयां होंगी, जिससे ऑनलाइन सेल होने वाली दवाइयों को पूरा डाटा तैयार हो सकेगा। इससे यह तय किया जा सकेगा कि ई-कॉमर्स के जरिए सिर्फ बेहतर क्वालिटी की और सेफ दवाइयां ही सेल की जाएं। ओरिजिनल प्रिस्क्रिप्सन देना जरूरी होगा नए गाइडलाइन में ऑनलाइन दवाइयों की खरीद के लिए डॉक्टर द्वारा लिखा गया ओरिजिनल प्रिस्क्रिप्सन जरूरी होगा। प्रिस्क्रिप्सन की अथेंसिटी बिना चेक किए कोई भी ई-कॉमर्स कंपनी दवा नहीं दे सकती है। इन दवाइयों पर लग सकती है रोक हेल्थ निनिस्ट्री से मिली जानकारी के अनुसार नई गाइड लाइन में नॉरकोटिक मेडिसिन जैसे मॉर्फिन और हैबिट फॉर्मिंग मेडिसिन जैसे नींद की दवाइयों के ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म पर बिकने पर रोक लग सकती है। इसके लिए साइड इफेक्ट के डर वाली कुछ दवाइयों की लिस्ट तैयार की गई है। फॉर्मासिस्ट का भी ऑथेंटिकेशन जरूरी ई-कॉमर्स कंपनियों को अपनी वेबसाइट या मोबाइल ऐप पर अपने प्लेटफॉर्म से जुड़े फॉर्मासिस्ट के लोगो, लाइसेंस, कॉटैक्ट आदि की जानकारी देना जरूरी होगा। दवाइयों की जानकारी देनी होगी ई-कॉमर्स कंपनियों को अपने प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध सभी दवाइयों की लिस्ट के साथ उन्हें बनाने वाली कंपनी के नाम व उनकी क्वालिटी भी बतानी होगी। इसके लिए सरकार ने ड्रग एंड कास्मेटिक एक्ट में बदलाव करने की भी बात कही है। सरकार ने मानी ई-फॉर्मेसी मॉडल में बदलाव की जरूरत हेल्थ मिनिस्ट्री के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि आज की डेट में ई-फॉर्मेसी जरूरत बन गई है। इंटरनेट की पहुंच बढ़ने के साथ लोगों को इसके जरिए फायदा मिल रहा है। इसके जरिए घर बैठे 24 घंटे दवाइयों की उपलब्धता रहती है। हालांकि भारत में ई-फॉर्मेसी का मॉडल अभी रेग्युलेट नहीं है, जिससे कुछ शिकायतें आ रही हैं। इस वजह से एक तय गाइडलाइन से मॉडल को रेग्युलेट किए जाने की जरूरत है।
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